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Mon. Dec 17th, 2018

बुलंदशहरः तब्लिगी इज़्तमा आयोजन के उपरांत फैले प्रदूषण की सफाई की मांग, स्थानीय विधायक ने पर्यावरण मंत्री को लिखा पत्र, प्रदूषण में एनसीआर और दिल्ली से आगे पहुंचा बुलंदशहर

  • पन्द्रह से बीस लाख अकीकदमंदों ने अदा की नमाज, स्थानीय हिन्दुओं ने भी अपने धर्म स्थलों में अदा कराई नमाज़

बुलंदशहरः जहां एक ओर गौकशी के बाद फैली हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कांत हत्याकांड को लेकर बुलंदशहर सुर्खियों में हैं, वहीं कुछ स्थानीय हिन्दुओं द्वारा अकीदतमंदों के लिए अपने मंदिरों में नमाज़ अदा करने की अनुमति देकर गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिशाल भी कायम की है जिसकी हर तरफ तारीफ़ हो रही है। लेकिन आयोजन के बीच हुई हिंसा ने रंग में भंग कर दिया वहीं दूसरी ओर आयोजन समाप्त होने के बाद जिले में फैले प्रदूषण ने भयावह रूप ले लिया है जिसकी सफाई एक बड़ा मुद्दा बन गया है। जिसको लेकर भाजपा के विधान मंडल दल के मुख्य सचेतक एवं स्थानीय विधायक वीरेन्द्र सिंह सिरोही (विधानसभा क्षेत्र 65) ने केन्द्रीय पार्यावरण मंत्री भारत सरकार को एक शिकायती पत्र लिखा है। जिसमें प्रतिबन्धित पाॅलीथिन, प्लास्टिक गिलास, प्लेट और अपशिष्ट सामग्री के जलाये जाने पर होने वाले वायू प्रदूषण को तत्काल रोकने की बात कही है। व साथ ही कार्यक्रम आयोजकों से कार्यक्रमस्थल व आस-पास के गावों की सफाई कराये जाने अथवा प्रशासन द्वारा वहां की सफाई सुनिश्चित कराकर सफाई पर आने वाले व्यय को आयोजकों से वसूले जाने की मांग की है।

उनका कहना है की दिल्ली में यमुना के तट पर श्री श्री रविशंकर द्वारा किये गए बृहद धार्मिक आयोजन के बाद फैले प्रदूषण की सफाई के सापेक्ष में उच्चतम न्यायलय द्वारा श्री श्री रविशंकर की संस्था से पूरे इलाके की सफाई में होने वाले व्यय को वसूल किया गया था। इसी तरह तब्लिगी इज़्तमा के आयोजकों से भी पूरे इलाके की सफाई पर आने वाले व्यय को वहन करने की मांग की है, जिससे पूरे इलाके और उनकी विधानसभा को प्रदूषण मुक्त किया जा सके, दरअसल, बुलन्दशहर में आलमी तब्लिगी इज़्तमा में उम्मीद से ज्यादा दुनिया भर से आये कई लाख अकीदतमंदो से दरियापुर का इलाका विशाल जनसमूह से भर गया था। जहां दो से तीन लाख अकीकदमंदों के पहुंचने की उम्मीद थी वहां पन्द्रह से बीस लाख अकीकदमंदो के पहुंच जान से आयोजन बेइंतिहा बदइन्तिजामी का शिकार हो गया। जिससे आयोजन में आये प्रतिभागियों से बुलंदशहर से लेकर शिकंदराबाद के पूरे 15 किमी. के इलाके में अपार जनसमूह और वाहनों का काफिला स्थानीय खेतों और मैदानों में फैल गया। जिससे लाखों लोगों के द्वारा इस्तेमाल सामग्री के अपशिष्ट से पूरा इलाका प्रदूषित हो गया। यही वजह है कि बुलंदशहर का प्रदूषण उच्च स्तर पर पहुंच चुका है।

मेजबानी कर रही इज्तिमा कमेटी की तरफ से भी अपने मुल्क और दूसरे देशों से आने वाली जमातों और मेहमानों के इस्तकबाल में कोई कोर कसर बाकी न रहे उसके लिए तमाम व्यवस्थाएं की गई थी। कुछ जानकार सुबोध कांत की हत्या इस मजलिस से जोड़कर भी देख रहे हैं। इस तब्लिगी इज़्तमा की तैयारियां पिछले तीन माह से चल रही थी। वहीं बुलंदशहर में हिन्दू समाज के लोगों ने भी नमाजियों की अधिक संख्या बढ़ जाने से शिव मंदिर और उसकी धर्मशाला में नमाज की इजाजत देकर एकता की मिसाल पेश की। हालांकि कुछ लोगों को यह बात बर्दाश्त नहीं हुई कि मुस्लिम मंदिर में नमाज पढ़े। सोशल मीडिया पर मन्दिर में नमाज अदा करने के कुछ फोटो वायरल होने के बाद लोगों ने हिन्दू-मुस्लिम एकता की इस नजीर की खुल कर तारीफ की, लोगों का कहना है कि इस तरह की नजीर से हमारे राजनीतिक दलों और समाज को बांटने वाले लोगों को सबक लेना चाहिये। वहीं सुबोध कांत हत्याकांड की जांच कर रहे अधिकारी कहीं न कहीं तब्लिगी इज़्तमा को बुलंदशहर में हुई दो हत्याओं से जोड़कर देख रहे हैं।

गौरतलब है कि मुसलमानों के इस धार्मिक आयोजन के लिए कई पशुओं को काटा गया, जिससे बुलंदशहर का माहौल भी बिगड़ा और प्रदूषण का स्तर भी। जानकारों के अनुसार बुलंदशहर में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। जगह-जगह खुलेआम कूड़ जलाया जा रहा है। इसके चलते बुधवार को एक्यूआई 392 मापा गया, जो खतरे के निशान के काफी नजदीक है। बीते नवम्बर माह में दीपावली के बाद जिले की वायु प्रदूषण में लगाम न लगाने पर और कूड़ा एवं प्लास्टिक आदि जलाए जाने पर और पुराने वाहनों के लगातार संचालन होने से वातावरण में पहले ही प्रदूषण का स्तर घटने की जगह लगातार बढ़ रहा है। सुबह के समय आसमान में स्माॅग की परत फैल रही है। वातावरण में सल्फरडाई आक्साइड और कार्बन डाई आॅक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ने से पर्यावरण को ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी काफी नुकसानदेय साबित हो रही है। पर्यावरण विशेषज्ञ राजेंद्र पथिक और समाजसेवी अनिल शर्मा के अनुसार वायु प्रदूषण बिगड़ने के लिए बुलंदशहर के लोग स्वयं जिम्मेदार हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी जीएम श्रीवास्तव का कहना है कि वातावरण में बदलाव के चलते एक्यूआई में लगातार इजाफा हो रहा है।

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