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चुनाव में ‘धांधली’ करने पहुंचे JDU नेता प्रशांत किशोर को ABVP वालों ने सिखाया सबक, गाड़ी के शीशे तोड़े

 

पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव छात्र जदयू और एबीवीपी एक बार फिर आमने सामने आ गया। सोमवार देर शाम कुलपति से मिलकर बाहर निकले जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की गाड़ी पर विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पथराव कर दिया। पथराव में प्रशांत किशोर बाल-बाल बचे। हालांकि उनकी गाड़ी का शीशा फूट गया। इसके बाद वहां मौजूद पुलिस ने छात्रों को दौड़ाकर पीटा। एक छात्र करण को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एबीवीपी के करीब दो दर्जन कार्यकर्ता भी हिरासत में लिए गए, जिन्हें देर रात छोड़ दिया गया। दरअसल, शाम 5 बजे प्रशांत किशोर के पटना विवि कुलपति के आवास आने की खबर मिलते ही छात्र संगठनों के कार्यकर्ता कुछ देर में ही वहां पहुंच गए। विद्यार्थी व विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता आवास को चारों तरफ से घेर लिया और नारेबाजी करने लगे।

 

 

 

 

 

 

छात्रों का एक झुंड गंगा की तरफ से भी कुलपति आवास को घेर लिया। बाद में पुलिस के आने पर पीके को करीब साढ़े नौ बजे बाहर निकाला गया। तभी एक छात्र ने उनकी गाड़ी पर पथराव कर दिया। छात्रों ने आरोप लगाया कि पीके छात्र संघ चुनाव को लेकर कुलपति प्रो. रासबिहारी सिंह से मिलने आए थे। उनका सवाल था कि आखिर मतदान से दो दिन पहले उनका कुलपति से मिलने का क्या औचित्य है?इस दरम्यान एक फोटो आ गई। इसमें प्रशांत किशोर और पटना विवि के एक अधिकारी दिख रहे थे। यह फोटो मिनटों में वायरल हो गई। कुछ देर के बाद एक वीडियो व ऑडियो भी आया। इससे छात्रों की नाराजगी बढ़ गई। मामला गंभीर होता देख आला पुलिस अधिकारियों को खबर की गई। जिसके बाद पीरबहोर, कोतवाली, कदमकुआं, गांधी मैदान आदि थानों के पुलिस अधिकारी और पुलिस बल सैकड़ों की संख्या में कुलपति आवास आए। उनके साथ टाउन डीएसपी भी थे।

 

 

 

 

 

 

 

 

इन लोगों ने मोर्चा संभाला और छात्रों को समझाने का प्रयास करते रहे। लेकिन छात्र गेट के आगे सोए रहे। पुलिस ने किसी तरह प्रशांत किशोर को कुलपति आवास से निकाला। प्रशांत किशोर की गाड़ी पर पथराव के बाद पुलिस बल पटना विवि के हॉस्टलों में छापेमारी करने के लिए निकल गया। देर रात तक यह प्रक्रिया चलती रही। घटना से पहले एबीवीपी के पप्पू वर्मा को कुलपति आवास बुलाया गया। वहां पीके के साथ डॉ. उदयकांत मिश्रा भी थे। वो खुद को बिहार आपदा प्रबंधन का सदस्य बता रहे थे। उनका कहना था कि वह पीके के चाचा हैं। कुलपति से पटना सायंस कॉलेज में बननेवाले अर्थ क्वेक सेंटर के बारे में बात करने आए थे।

चूंकि पीके को एनआईटी के पास मौजूद एक जाननेवाले जावेद आलम के यहां जाना था। इसलिए वो भी उनके साथ हो लिए। वहीं पीके ने भी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा उनका कुछ ऐसा ध्येय नहीं था। हम चाचा के साथ आए थे। इतनी छोटी बात को बेवजह तूल दिया जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी गाड़ी से ही उनके चाचा भी आए थे।सुबह तक एक-दूसरे पर कटाक्ष करनेवाले संगठनों में सोमवार शाम को गजब एकता देखने को मिली। एबीवीपी, छात्र जन अधिकार परिषद, एनएसयूआई-हम, वाम पंथी संगठन, आरजेडी सहित पटना विवि छात्र संघ के निर्दलीय उम्मीदवार और उसके समर्थक कुलपति आवास के आगे जमा हो गए और आपस में रणनीति बनाकर कुलपति आवास को घेर लिया। छात्र नेता लवकुश ने आरोप लगाया कि जदयू नेता का पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में हस्तक्षेप करना निंदनीय है।

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