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डग्गामार बसों से रोडवेज को हर माह करोङो का घाटा।

लखनऊ  राजधानी लखनऊ में सरकारी विभागों की उदासीनता के चलते हर माह सरकार को करोङो रूपये का नुकसान हो रहा है। जबकि सरकार उन अधिकारियों पर एक मोटी रकम खर्च कर रही है जिन पर विभाग को जिम्मेदारी से चलाने का जिम्मा है। हालात ये है की विभागों के सुस्त अधिकारियो की वजह से आज सरकार अरबों रूपये का नुकसान झेल रही है।इन्हीं विभागों में से एक विभाग है रोडवेज, जिसमें सरकार ने अरबों रूपये लगाकर नये नये बस अड्डे बनाये है। हजारों नई बसें खरीदी गई है । इन सब बातों से अधिकारियों को कोई मतलब नहीं है। उनका काम है बस अपने रूम में बैठकर योजनाओं को लागू करना। लेकिन इससे अलग रोडवेज के अधिकारियों को इस बात से कोई मतलब नहीं है की सैकङो की संख्या में डग्गामार बसें राजधानी के विभिन्न हिस्सों से संचालित होती है।

थाना मानक नगर के अन्तर्गत आलमबाग नहरिया से दिन ढलते ही सैकङो बसें दिल्ली, जयपुर, शिमला,व आगरा, चण्डीगढ के लिए जाती है। दर्जनों डीलक्स बसें यहाँ से संचालित की जाती है वो भी पुलिस चौकी के बराबर से। इन बसों के खङे होने की वजह से शाम से देर रात तक आलमबाग नहरिया पर जाम की स्थिति बनी रहती है। हालत ये हो जाती है की कभी-कभी घण्टों जाम लगा रहता है। ये बसें यही से सवारियां भरकर गन्तव्य की ओर चली जाती हैं ।

राजधानी के प्रमुख चौराहा से डग्गामार बसों का संचालन हो रहा है और अधिकारियो को कानों कान खबर नहीं है की दर्जनों डग्गामार बसों के संचालन से रोडवेज को कितना नुकसान हो रहा है। इन बसों की अधिकारियों से सेटिंग गन्तव्य तक होती है।बीच-बीच में मिलने वाले आरटीओ और पुलिस कर्मियों को माहवार रकम पहले ही एकमुश्त दे दी जाती है। इसी के चलते ये बसें खुलेआम सरकार को चूना लगाकर डग्गेमारी कर रही है। अगर सरकार जल्दी ही नही चेती तो रोडवेज का बंटाधार होने से कोई नही रोक सकता।
सरकार जल्दी ही भ्रष्ट अधिकारियों पर लगाम कसे ताकी रोडवेज को खत्म होने से रोका जा सके।

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