भूमाफिया ने बेची केडीए की लगभग दो सौ करोड़ की भूमि।

* करोडों की जमीन पर कब्जे और उसे हटाने के आदेशों के बाद भी हाथ पर हाथ रखकर बैठा है केडीए प्रशासन।

        कानपुर

 भूमाफिया का वर्चस्व न ही किसी विभाग से छुपा है और न ही आला अफसरों से। शहर में जहाँ तहाँ जमीनों पर कब्जा कर उन्हें फर्जी दस्तावेजों से बेचने वाले भूमाफियाओं ने इस बार केडीए के नीचे से ही उसकी जमीन खिंच ली है और विभाग है कि जिसे कोई फर्क पड़ता दिखाई ही नहीं दे रहा है।

कानपुर भूमाफियाओं की ये कारगुजारी है देहली सुजानपुर की जिसकी गाटा संख्या 93 की भूमि जिसकी कीमत लगभग 200 करोड़ या उससे भी ज़्यादा है को फर्जी दस्तावेजों और जालसाजी कर बेच डाली। इस जमीन की जालसाजी में क्षेत्र के बड़े भूमाफिया सुरेश शुक्ला, सुरेश पाल और दीपक यादव उर्फ दीपक चौधरी सामिल है जिनके खिलाफ कानपुर के कई थानों में पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। भूमाफियाओं की इस टोली ने विश्वकर्मा कोऑपरेटिव सोसाइटी की सरपरस्ती में क्षेत्र की उन ऊसर और रिहायसी जमीनों को बेच डाला जिनकी सुध लेना शायद केडीए भूल गया था।इतना करने के बाद भी सुरेश शुक्ला, सुरेश पाल और दीपक पर किसी तरह की कार्यवाई नही हुई तो बुलंद हौसले वाले इन भूमाफियाओं ने उन जमीनों का भी सौदा कर दिया जो अनुसूचित जातियों के लिये सुरक्षित की गई थी और जिनके पट्टे किये गए तब जबकि पट्टों की जमीन को प्रशासनिक अधिकारियों की अनुमति या आदेश के बिना बेचा या खरीदा नही जा सकता। जमीनों की इस अवैध खरीद फरोख्त के समय केडीए प्रशासन की आंखे बंद रही।
पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद वर्ष 2014 में अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) शत्रुघ्न सिंह ने केडीए प्रशासन को जाँच कर आख्या दी और आदेश किया कि ” देल्ही सुजानपुर गाटा संख्या 93 में 2.6220 हेक्टेयर भूमि ऊसर भूमि के रूप में दर्ज है जो कि कानपुर विकास प्राधिकारण के प्रबंधन में है अतः केडीए उक्त भूमि को कब्जा मुक्त कराकर अपने कब्जे में ले”। पर इस आदेश से भी केडीए की नींद नही टूटी। जिसके चार साल बाद केडीए के उपाध्यक्ष विजय पांडियन और बाद में सौम्या अग्रवाल ने भी कडीए सचिव के पी सिंह को इन भूमाफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा भूमि का कब्जा लेने का निर्देश दिया पर केडीए के दोनों उपाध्यक्षों की आदेशों को हवा में उड़ा दिया गया। विभाग में निरंकुशता का आलम ये है कि वर्तमान केडीए उपाध्यक्षा किंजल सिंह ने अभी भी इस मामले में कोई करवाई नही की है जबकि पूर्व के दोनों उपाध्यक्ष केडीए की इस करोडों की सम्पत्ति को अधिकार में लेने को प्राथमिकता देते हुए आदेश दे चुके हैं।

खैर केडीए प्रशासन अपनी जमीन भूमाफियाओं से कब और कैसे वापस लेता है ये केडीए ही जाने लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि अगर यूँ ही भूमाफियाओं के कारनामों पर केडीए प्रशासन मौन और निरंकुश बना रहा तो वो दिन दूर नही जब केडीए को मोदी और योगी सरकार नही बल्कि सुरेश शुक्ला, सुरेश पाल और दीपक चौधरी जैसे भूमाफिया चला रहे होंगे।

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