महाराष्ट्र / सरकार पर गुस्सा, मुंबई में 30 हजार किसानों का प्रदर्शन; मुख्यमंत्री ने मिलने बुलाया

महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ किसान संगठनों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया। सरकार की वादाखिलाफी और कर्जमाफी समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे 30 हजार किसान ठाणे से पैदल मार्च करते हुए गुरुवार सुबह मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे। यहां एक सभा के बाद इनकी विधानभवन के सामने प्रदर्शन की तैयारी है। किसान संगठनों ने इस मार्च को लोकसंघर्ष मोर्चा का नाम दिया है। मुंबई में 55 साल बाद विधानमंडल का शीतसत्र हो रहा है। वैसे शीतसत्र नागपुर में होता रहा है।

उधर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया है। वह विधानसभा में मुलाकात करेंगे। किसान प्रदर्शन को देखते हुए मुंबई में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। किसानों के इस प्रदर्शन में पुरुष और महिलाओं के अलावा बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि मार्च में राज्य सरकार ने उनकी मांगें पूरा करने का वादा किया था। मांगें पूरी नहीं की गई है। जल विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह और स्वराज अभियान के संस्थापक योगेंद्र यादव मार्च में शामिल होंगे। दोनों दिल्ली में 29 नवंबर से होने वाले किसान सम्मेलन के संयोजक की भूमिका में हैं। इससे पहले मार्च में किसानों ने मुंबई में प्रदर्शन किया था। महाराष्ट्र में इस साल 30 फीसदी कम बारिश हुई है। आधे राज्य यानी 180 तहसीलों में सूखा है।

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों ने सरकार के सामने जो मांगें रखी हैं। उनमें समर्थन मूल्य में किसानों को 50 फीसदी लाभ, कृषि पंप ट्रांस्फॉर्मर के 48 घंटे में मरम्मत, शीतकाल में सिंचाई के लिए बिजली, स्कूल के पोषक आहार में केला शामिल करना भी शामिल है।

 

  • किसानों के लिए संपूर्ण कर्जमाफी।
  • कृषि उत्पाद को दोगुना भाव मिले।
  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों पर अमल हो।
  • वन अधिकार कानून पर अमल हो।
  • जिस जमीन पर आदिवासी खेती कर रहे हैं, उसे आदिवासियों के नाम पर किया जाए।
  • नदी जोड़ो परियोजना से सिंचाई के लिए पानी मिले।
  • बिजली के बिल में छूट मिले।सरकार ने मार्च में समिति बनाई, लेकिन मांगें पूरी नहीं हुईं 
    मार्च में 40 हजार किसानों ने नासिक से मुंबई तक रैली निकाली थी। तब सीएम देवेंद्र फडणवीस ने किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए समिति गठित की थी। किसानों ने संपूर्ण कर्जमाफी, असिंचित जमीन के लिए 50 हजार और सिंचित जमीन के लिए एक लाख रुपए प्रति एकड़ सूखा राहत, कृषि उपज को दोगुना भाव, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों और मुफ्त बिजली सहित कई मांगें सरकार के सामने रखी थीं।

    अाप, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति का समर्थन 
    आम आदमी पार्टी, स्वराज अभियान, अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति ने किसानों के मार्च का समर्थन किया है। आम आदमी पार्टी नेता प्रीति मेनन ने किसानों के समर्थन में प्रेंस कॉन्फ्रेंस की थी। प्रीति ने कहा कि राज्य में कई स्थानों पर सूखा है। सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है।
    दिल्ली के सम्मेलन में 6 राज्यों से किसान आएंगे 
    अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की अगुवाई में दिल्ली में 29 और 30 नवंबर को किसान सम्मेलन होगा। समिति ने पिछले छह महीनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और पंजाब में हुए किसानों के आंदोलन में भाग लिया। सम्मेलन में इन राज्यों के किसान शामिल होंगे।

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