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यूरिया के उपयोग से भूजल प्रदूषित, कैंसर-डायबिटीज जैसे रोगों की आशंका बढ़ रही है

यूरिया के प्रयोग में बढ़ती आने से भूजल प्रदूषित हो रहा है। यूरिया में पाए जाने वाले नाइट्रोजन के पानी-हवा में मिलने से वह नाइट्रेट में बदल जाता है। शरीर में पहुंचने पर यह कई नाजुक अंगों की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। मधुमेह और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा इसके कारण बढ़ता बढ़ रहा है। फर्टीलिज़ेर्स और चेमिकल्स की मात्रा बढ़ने से पच्छिमी यूपी पर इसका खतरा अधिक है। फसलों में कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग भी इसका मुख्य कारण है।

नाइट्रेट, नाइट्राइट और अमोनियम के रूप में नाइट्रोजन भूजल में पहुंचती है। इसका कारण खुले में मल विसर्जन, यूरिया के ज्यादा प्रयोग, बूचड़खानों और डिस्टलरी से भी काफी मात्रा में नाइट्रोजन पहुंचती है।

उत्तर प्रदेश सहित पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, तथा छत्तीसगढ़ में भी यह समस्या बढ़ रही हैऔर भूजल दूषित पाया गया है दूषित। मेरठ, मुरादाबाद समेत सहारनपुर में यह नाइट्रेट का खतरा ज्यादा बढ़ा है।

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