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ये हैं महाराणा प्रताप के वशंज..आज भी राजपूताना शान से रहते हैं-कभी ब्रिटेन में करते थे नौकरी

महाराणा प्रताप के वंशज अरविंद सिंह मेवाड़ राजघराने 76 वे संरक्षक है अरविंद ने मायो महाविद्यालय से पढ़ाई की थी। उसके बाद वह ब्रिटेन चले गए थे जहां उन्होने होटल मेनेजमेंट का कोर्स किया था। अरविंद ने इंगलेंड और ब्रिटेन मे नौकरी भी की थी।


अरविंद सिंह को कारों का बहुत बड़ा शौक है उनके पास रोलस रोयस की सबसे अधिक कारों संग्रह है।ये सभी गाडियाँ मेवाड़ के राजाओ की निशानिया है। अरविंद सिंह के पास पूरे भारत मे मकान है। अरविंद सिंह पूरे भारत मे होटल का एक संघठन चलाते है। इस संघठन की शुरवात अरविंद के पिता ने चालू किया था। यह संघठन पूरे भारत मे बेहतरीन तरीके के होटल प्रदान करता है। अरविंद सिंह को तलवारबाजी का बहुत बड़ा शोक है। उदयपुर के महाराणा अरविन्द सिंह मेवाड़ ने आम आदमी की जिंदगी का अनुभव लेने के लिए 3 साल एक कमरे के घर में बिता दिए। मैनचेस्टर इवनिंग न्यूज ने ये स्टोरी पब्लिश की है, जिसे उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल में शेयर किया है। दरअसल अरविंद सिंह मेवाड़ एक दिन सुबह जब वो टहलते हुए पिछोला नदी के तट पर पहुंचे, तो उन्हें अपनी ये जिंदगी थोड़ी ऊबनभरी लगी और उन्हें कुछ खालीपन महसूस हुआ। ऐसे में वो राजमहल के सभी ऐशो आराम छोड़ ब्रिटेन पहुंच गए।ब्रिटेन के मैनचेस्टर में उन्होंने एक कमरे के घर में करीब तीन साल का वक्त गुजारा। अब वो 72 साल के हो चुके हैं और उदयपुर में अपने फैमिली के साथ रह रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राजा अरविंद ने बताया कि मैनचेस्टर जाना उनकी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट था।वे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट ही हुए थे और क्रिकेट के जुनूनी थे। उन्होंने कहा कि जब वो एयरपोर्ट पहुंचे, तब अकेले जाने में थोड़ा डरे हुए थे, लेकिन मैनचेस्टर पहुंचकर उन्हें कपड़े की फैक्ट्री में जूनियर एग्जीक्यूटिव की जॉब मिल गई। मैनचेस्टर में उन्होंने जमकर क्रिकेट खेला और वह सभी शौक भी पूरे किए, जो शायद एक राजा होते हुए वह पूरा नहीं कर सकते।अरविंद सिंह मेवाड़ के मुताबिक मुझे इस बात पर गर्व है कि यहां रहने के दौरान मुझे अपने पिता से पैसे नहीं मांगने पड़े। मैंने अपनी कमाई में ही गुजारा किया। यही नहीं, मैनचेस्टर के हेल में उन्होंने एक कमरे का मकान ले रखा था। यहां सब्जियां खरीदने से लेकर किचन में खाना पकाने तक उन्होंने सबका अनुभव लिया। ये आजादी उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं की थी।अरविंद सिंह मेवाड़ कहते हैं कि ‘मुझे अपना ट्रेन में पहला दिन याद है, जब मैंने खुद टिकट खरीदा था। ये बाकी लोगों के लिए एक सामान्य बात है, लेकिन ये मेरी जिंदगी के लिए बिल्कुल नई चीज थी। राजा अरविंद उदयपुर राजघराने के घराने के 76वें संरक्षक हैं। उनके पिता भगवत सिंह ने 1955 से 1984 तक मेवाड़ घराने की कमान संभाली। वह महाराणा प्रताप के वंशज हैं। मैनचेस्टर जाने से पहले अरविंद सिंह 250,000 स्क्वेयर फीट के महल में शानो-शौकत भरी जिंदगी गुजार रहे थ

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