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रोडवेज बसों की हालत बदतर, सर्दियों में कैसे यात्रा करेंगे यात्री

  • झकरकटी में यात्रियों के लिए कोई सुविधा नही, टूटे शीशे से कैसे होगी सार्दियों में यात्रा
कानपुर सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है ऐसे में बसों के द्वारा लंबी यात्रा करने वाले यात्रियों को इस बार खासी परेशानी उठानी पड सकती है या फिर लोग रेाडवेज की बसों को यात्रा के लिए नही चुनेंगे। कारण यह है कि उत्तर प्रदेश्ज्ञ राजय सडक परिवाहन निगम यात्रियों को सुविधा देने में तो शून्य है लेकिन शुल्क की वसूली पूरी करता है। कई बार समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित होने के बाद भी झकरकटी बस स्टेशन प्रशासन द्वारा कोई कदम नही उठाये जा रहे है। अधिकारी आश्वासन तो देते है लेकिन उनके गोल-मोल जवाबो के कोई मायने नजर नही आते।
                                    
रोडवेज की बसों की हालत खस्ता हो चली है। अधिकारी इस ओर ध्यान नही दे रहे है ऐसे में सर्दी में यात्रियों को परेशानी उठानी ही पडेगी। झकरकटी बस अडडे पर देखा जाये तो पुरानी, खटारा बसे जिनके सीसे तक टूटे है, जिन्हे मरम्मत की दरकार है लेकिन बसों की ऐसी हालत पर रोडवेज प्रशासन ध्यान नही दे रहा है। यात्री भी ऐसे में यात्रा करने को मजबूर है। उत्तर प्रदेश राज्य सडक परिवहन निगम द्वारा सुविधा के नाम पर तो यात्रियों को कुछ नही दिया जा रहा है, जबकि शुल्क पूरा वसूला जा रहा है। 0 से 40 किमी तक सुविधा शुल्क 1.25 पैसा तो 41 से 85 किमी तक सुविधा शुल्क 2.25 पैसा है।
इतना ही नही परिवहन अपने यात्रियों से तीन प्रकार के शुल्क भी वसूलता है जिमसें सुविधा शुल्क, दुर्घटना बीमा शुल्क तथा दुर्घटना अधिभार शुल्क लेकिन इस शुल्क की सुविधाये कितनी यात्रियों को मिल पाती है या यात्रियों को इसकी जानकारी भी है या नही यह कह पाना भी सही नही है। वहीं अधिकारी इस सम्बन्ध में घिसा-पिटा राग ही अलापते है और उनके पास पहले से तैयार कई बहाने रहते है। फिलहाल रोडवेज प्रशासन के अधिकारियों को यात्रियों की परेशानी से कोई सरोकार नही है। बस स्टाॅप पर यात्रियों को किराये के नाम पर लूटा जा रहा है। टिकट पर भी पूरे शुल्को का विवरण नही होता है और यात्री भी यह जानने की कोशिश नही करता। इसी प्रकार अनियमितताओं के बीच हजारो यात्री बस में सफर कर रहा है। यदि बसों की यही व्यवस्था रही तो सर्दी बढने के साथ ही बसों की यात्रा करने वाले यात्री भी कम हो जायेगे फिर रोडवेज प्रशासन के अधिकारी यात्री कम होने का रोना रायेंगे।

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