fbpx

क्या धर्मांतरण से देश की संस्कृति को खतरा हो सकता है?

मोजेस न्यूज़

नई दिल्ली- देश भर में लगातार धर्मांतरण की खबरों के बीच ये बात सामने आती रही है की ईसाई प्रचारक लगातार दलितों का धर्मांतरण(Religion Conversion ) कर रहे हैं। ये बात सच भी है की ईसाई प्रचारक वास्तव में धर्मांतरण के कार्य में लिप्त है। मगर ये धर्मांतरण वाले लोग धर्म परिवर्तन करने के बाद आखिर जाते कहाँ है । उधर देश में जनसंख्या के मामले में ईसाई समुदाय की जनसंख्या लगातार 2,3 ही बताई जा रही है । फिर वो धर्म परिवर्तन करनेवाले लोग कहाँ है।
इस बात पर नजर डालें तो ये प्रचारक जिन दलितों का धर्मांतरण करते है वो लोग अपना पुराना धर्म नहीं छोङते हें। क्योंकि उनको दलितों के नाम पर सरकार से फायदा जो मिलता है। यानि धर्म परिवर्तन करने वाले लोग दो नाव पर सवार है। एक तरफ दलितों के नाम पर मिलने वाला सरकारी फायदा का लाभ उठाते है तो दूसरी तरफ ईसाई धर्म अपना कर अपने आपको जनरल कास्ट में खङा कर सम्मान लेने की बात करते है।

वहीं ईसाई प्रचारक भी धर्मांतरण करा आगे अगले शिकार की खोज में निकल जाते है। और धर्मांतरण के लिये नये नये लोगों को गुमराह व पैसे का लालच देकर फंसाते हें।
अब सवाल यह उठता है की धर्म के इन ठेकेदारों के पास इतना धन कहां से आता है जो ये लोग अय्याशी भरा जीवन जीते है।
अकेले लखनऊ व दिल्ली में ही तमाम धर्म के ठेकेदार है जो भोगविलासिता का जीवन जी रहे है।
कम समय में अमीर बनने वाले ईसाई धर्मगुरूओं की संख्या काफी है। लखनऊ में एक चर्च के फाऊंडर बिशप आज इसके अपवाद है। कम समय में देशभर में लगभग 500 चर्च का नेटवर्क खङा करने वाले लखनऊ के एक बिशप अचानक से अरबपति कैसे बन गये? इन सब सवालों के जवाब कोई नही जानना चाहता। चेन्नई में दिनाकरन परिवार पांच सौ करोड़ की सम्पत्ति के साथ लगातार पैसा कमा रहा है। क्या इन लोगों के कोई और धन्धे चल रहे हें। ये अलग बात है की धर्म के नाम पर करोङो रूपये कमा कर ये अलग धन्धे डाल लेते है। गाजियाबाद में बिशप मोहन लाल जिस तरह रेबङियो की तरह बिशप की डिग्रियां बांट रहे है क्या उससे धर्मांतरण को बङाना नहीं मिल रहा ?? दिल्ली में पिछले वर्ष एक नई डायोसीज ने थोक के भाव बिशप बना दिये । यहाँ तक की एक भाजपा नेता को भी बिशप बना दिया। न इनके पास चर्च है और न ही कलीसिया, फिर भी बिशप है। धर्म का ज्ञान नहीं फिर भी ईसाइयों के महाधर्मगुरू बन बैठे ये तथाकथित ईसाई । ।
अब एक बार फिर हम धर्मांतरण की बात करते है की देश में धर्मांतरण के नाम पर कुछ धर्मांतरण माफिया सक्रिय है जो विदेशों से मोटा धन मंगा रहे है। और भोले भाले दलितों को बहला फुसला कर धर्मांतरण के जाल में उलझा देते है।और अपना उल्लू सीधा होते ही निकल लेते है। मगर धर्म परिवर्तन करने वाला मंझधार में फंस जाता है। वो ना ईसाई बन पाता है और ना ही वो हिन्दु ही रह पाता है।
आज पांच हजार रूपये में फर्जी डिग्री देकर ईसाई पादरी बनाया जा रहा है। तमाम फर्जी बिशप डिग्री और डिप्लोमा बेचने का धन्धा कर रहे है। अनपढ़, चोर उचक्के, लुच्चे लफंगे आज फर्जी डिप्लोमा लेकर पादरी बन गये हैं ।

सरकार को धर्मांतरण और ईसाई पादरियों द्वारा धांधली करके बङे पैमाने पर फर्जीवाङा करने के धन्धों पर लगाम लगानी होगी। नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब देश इस धर्मांतरण से कराह उठेगा। देश की जो एक संस्कृति है वो खतरे में पङ जायेगी।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.