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नीतीश सुशासन में जंगल राज ‘रिर्टन्स’, चौंकाने वाला है ह’त्या का ग्राफ, रोज 7 को भेजा जा रहा परलोक

बिहार की मौजूदा नीतीश सरकार किसी जमाने में सुशासन की सरकार के रूप मे जानी जाती थी। ये वह दौर था जब कानून व्यवस्था को लेकर बिहार की छवि देश भर में बेहतर थी लेकिन धीरे-धीरे हालात बदले। अब तो नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार कानून व्यवस्था को लेकर सवालों के घेरे में है। सवाल ना केवल विपक्ष उठा रहा बल्कि सत्ता पक्ष की सहयोगी पार्टी भी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही है।सूबे में होने वाली अपराध की घटनाएं चरम पर हैं। पिछले 18 सालों में हत्या का ग्राफ चौंकाने वाला है। पुलिस मुख्यालय हालात बेहतर होने का दावा कर रहा है तो पुलिस अफसरों का संगठन आलाधिकारियों को जिम्मेवार ठहरा रहा है।

दरअसल बिहार में पुलिस मुख्यालय लगातार कानून-व्यवस्था बेहतर होने का दावा कर रहा है लेकिन पुलिस मुख्यालय के आंकड़े अब भी भयावह हैं।सूबे में अब भी रोजाना औसतन सात से अधिक लोग मारे जा रहें हैं और हत्या जैसी संगीन वारदातें यहां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात कमोबेश आज भी वैसे ही है जो पिछले 18 साल से हैं। एक नजर डालते है हर साल प्रतिदिन होने वाली हत्या के आकड़ों पर-2001 में ये आंकड़ा 9.92 था यानि रोजाना करीब 10 लोगों की हत्या जो 2002 में 9.96, 2003 में 10.01, 2004 में 10.58 जा पहुंचा। साल 2005 में हत्या का ये आंकड़ा 9.38 पहुंचा तो 2006 में 8.84, 2007 में 8.12, 2008 में 8.30, 2009 में 8.64 पहुंचा. साल 2010 में प्रतिदिन होने वाली हत्या का आंकड़ा 9.21 था जो 2011में 8.76, 2012 में 9.77, 2013 में 9.43, 2014 में 9.32, 2015 में 8.71, 2016 में 7.07 जबकि 2017 में 7.06 है।

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