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6 करोड़ लोगों को EPFO ने दिया तोहफा, बढ़ाई ब्याज दर

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ब्याज दर बढ़ा दी है, जिससे छह करोड़ अंशधारकों को लाभ मिलेगा। वर्ष 2016 के बाद पहली बार है कि जब ब्याज दर में बढ़ोतरी की गई है।

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने इसकी जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्याज दर बढ़ाने का फैसला सर्वसम्मति से हुआ। ईपीएफओ बोर्ड की सिफारिश के अनुसार, वित्त वर्ष 2019 में ब्याज दर 8.65 फीसदी रहेगी। वित्त वर्ष 2018 में यह 8.55 फीसदी पर थी।

बोर्ड की बैठक में कर्मचारी पेंशन स्कीम के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर भी चर्चा की गई, लेकिन इस पर निर्णय अगली बैठक तक के लिए टाल दिया गया है। गौरतलब है कि श्रम मंत्रालय के अधीन सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ईपीएफओ का शीर्ष नीति निर्माण संस्था है। यही हर साल के लिए पीएफ पर जमा ब्याज दर का फैसला करता है।

प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की औपचारिक मंजूरी भी लेनी पड़ती है। मंजूरी मिलते ही नई ब्याज दर लागू हो जाएंगी। ईपीएफओ की वर्ष 2017-18 में 8.55 फीसदी की ब्याज दर पांच साल में सबसे कम थी। वर्ष 2016-17 में ब्याज दर 8.65 फीसदी और 2013-14 और 2014-15 में यह 8.75 फीसदी पर रही थी। वर्ष 2015-16 में यह 8.8 के उच्चतम स्तर पर थी।

ब्याज दर प्रतिशत में
2012-13 : 8.5
2013-13 : 8.75
2014-15 : 8.75
2015-16 : 8.8
2016-17 : 8.65
2017-18 : 8.55
2018-19 : 8.65

श्रम मंत्री की अध्यक्षता वाला न्यासी बोर्ड ईपीएफओ का निर्णय लेने वाला शीर्ष निकाय है जो वित्त वर्ष के लिये भविष्य निधि जमा पर ब्याज दर पर निर्णय लेता है। बोर्ड की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय से सहमति की जरूरत होगी। वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही ब्याज दर को अंशधारक के खाते में डाला जाएगा।

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