गाजीपुर रैली में बवाल, 1 पुलिसकर्मी की मौत,7 घायल,कॉन्स्टेबल के बेटे का बड़ा बयान

  • PM Narendra Modi Ghazipur Rally में एक सिपाही की मौत हो गई.

  • मुख्यमंत्री ने सुरेश वत्स के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया
  • सीएम योगी ने मारे गए कॉन्सटेबल की पत्नी को 40 लाख रुपए तथा उनके माता-पिता के लिये 10 लाख रुपए की सहायता देने के निर्देश दिये है .

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर (Ghazipur) में पीएम नरेंद्र मोदी की रैली (PM Narendra Modi Ghazipur Rally) के बाद उग्र भीड़ के पुलिस टीम पर पथराव (PM Narendra Modi Ghazipur Rally) में एक सिपाही की मौत हो गई.इस मामले में अब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलसि ने कॉन्स्टेबल की मौत के मामले (Ghazipur Violence) में 32 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है. इसके अलावा 60 अज्ञात के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. वहीं, मृतक कॉन्स्टेबल सुरेश वत्स के बेटे वीपी सिंह ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवाल उठा दिए. बताया जा रहा है कि पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा कथिततौर पर पत्थरबाजी से हुई है.

इस हिंसा में 7 पुलिसकर्मियों को चोटें भी आई हैं. गाजीपुर के सदर अस्पताल के डॉ. नवीन सिंह ने रविवार को मीडिया को बताया कि मारे गए पुलिस कॉन्सटेबल के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. डॉक्टर ने बताया कि पत्थबाजी में 7 अन्य पुलिसवालों को पांव में चोट लगी है, जिनका इलाज किया जा रहा है.

 

इस हिंसा के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मारे गए पुलिस कॉन्सटेबल के परिजनों को 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, एक परिजन को नौकरी तथा असाधारण पेंशन दिए जाने के निर्देश दिए हैं.

भाजपा विधायक का चौकाने वाला बयान-इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने खुद को मारी थी गोली

गाजीपुर में पथराव में अपनी जान गंवाने वाले सुरेश वत्स के बेटे वीपी सिंह ने कहा कि ‘पुलिस खुद की सुरक्षा करने में सक्षम नहीं है. हम उनसे क्या अपेक्षा कर सकते हैं? अब मुआवजा लेकर हम क्या करेंगे? इससे पहले भी बुलंदशह और प्रतापगढ़ में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं.’
दरअसल, सुरेश वत्स स्थानीय नोनहारा पुलिस स्टेशन पर तैनात थे. शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी की रैली स्थल पर उनकी ड्यूटी लगी थी. सुरेश और उनकी टीम जब वापस लौट रही थी. तभी उनके पास वायरलेस से संदेश आया कि निषाद समुदाय के लोगों का प्रदर्शन हो रहा है, उन्हें समझा-बुझा कर मामला ख़त्म कराया जाए. दरअसल निषाद समुदाय के लोग प्रदानमंत्री के दौरे के मद्देनज़र अलग आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, जिसमें उनके कुछ नेताओं की गिरफ़्तारी भी हुई थी. गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ ही समुदाय के लोग दोबारा सड़कों पर थे. जब पुलिस टीम ने इन्हें रास्ते से हटाने की कोशिश की, तो भीड़ ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, जिसमें कांस्टेबल सुरेश वत्स की मौत हो गई.

कॉन्सटेबल सुरेश वत्स के सिर में लगा पत्थर

हिंसा के दौरान लगे जाम को खुलवाने में जिले के थाना करीमुद्दीन पुर में पदस्थ सिपाही सुरेश वत्स (48) भी लगे हुए थे. पथराव में एक पत्थर सुरेश के सिर में भी लग गया और वह बुरी तरह से जख्मी हो गये. उन्हें तुंरत अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.

 

इससे पहले भी एक हिंसा दौरान इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत से पूरा राज्य सेहमा हुआ था और अब दूसरा हादसा ये हो गया.

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