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तमाम माताओं के बीच में खो चुकी है अपनी माता

लखनऊ (मोजेस न्यूज़) आज भारत में सैकङो माताओं के नाम लेता है आदमी-सीता माता , काली माता, सरस्वती माता, वैष्णो माता, चन्द्रिका माता, गाय माता, यहां तक की चेचक नामक बीमारी को भी माता के नाम से पुकारा जाता है या जाना जाता है। यहां पर उस मां को लोग भूल जाते है जिसने नौ माह अपनी कोख में रखकर उसको पैदा किया । जिसके लिये खुद भूखी रही मगर अपने हिस्से की रोटी उसको खिलाई।

जिसके लिये अपनी पूरी जिंदगी क़ुर्बान कर दी आज वही इन्सान अपनी माँ को मां न मानकर उन पत्थरों व जानवरों को मां मानता है। खुद की मां बुङापे में भूखी प्यासी पङी है उसकी चिन्ता नहीं है मगर बाकी माताओं की बहुत चिन्ता है। गाय माता के लिए तो आजकल किसी दूसरे की पीट पीटकर हत्या कर देने वाले लोग आज अपनी माँ को भूल गये।

अगर इसका उदाहरण देखना हो तो उन वृद्धाश्रम जाओ जहां पर ये बुजुर्ग लोग अकेले अपना जीवन यापन कर रहे हैं । जिन बच्चों को अपना दूध पिला कर पाला पोसा, जिनके लिये गर्म दोपहरी में स्कूल से आने का इन्तजार किया। जिनके लिये न सर्दी देखी न गर्मी, थोङी सी चोट बच्चे को लग जाये तो आसमान सर पर उठाने वाली माँ आज वृद्धाश्रम की शोभा बनी हुई है। आज हमारे देश में हजारों वृद्धाश्रम बने हुए हैं जिसमें हमारे ही माता-पिता रह रहे है और हम काल्पनिक माताओं को तो माता मानकर सब कुछ न्योछावर कर रहे है मगर हमको जन्म देने वाली अपनी माता किस हाल में है बिल्कुल भूल चुके है। अगर वास्तव मैं हम अपनी माँ को प्यार करते होते तो देश भर में इतने वृद्धाश्रम न खोलने पङते। लेकिन हम ये भूल गये है की जो दिन हमारे बुजुर्ग माता-पिता देख रहे है कल को वो हमारे साथ भी हो सकता है। जो हमने अपने माता-पिता के साथ किया, कल को हमारे बच्चे भी हमारे साथ ऐसा कर सकते है।

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