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देश में बढ़ते घरेलु हिंसा के मामले

घरेलू हिंसा हमारे समाज में एक आम बात है समाज क्या है ? हम और आप मिलकर ही बनाते हैं समाज. वही समाज जहां पुरुषों को औरतों की कदर नहीं होती। बात करें घरेलू हिंसा की तो यह केवल उन उन घरों में ही नहीं होता जो कम पढ़े लिखे हैं इस प्रकार की घटनाएं अच्छे और ऊंचे घरों में भी होती है घरेलू हिंसा का संबंध केवल गरीबी अमीरी से नहीं होता जो लोग पढ़े लिखे हैं उनके घरों में भी घरेलू हिंसा की घटनाएं होती हैं एक सत्य घटना के द्वारा मैं आपको एक कहानी बताऊंगी ।

बात तब की है जब मैं अपनी बुआ के घर गई मेरी बुआ का घर आर्थिक रूप से कोई कमी नहीं है । बस कमी है तो आदमियों की मानसिकता में जो कि औरतों की इज्जत नहीं करता है । वहां पर केवल औरतों को जेवरों से सजाकर समाज में प्रभुत्व स्थापित किया जाता है। दोपहर का समय था ।। फूफा घर के अंदर आए बैठे और बुआ से चाय बनाने को कहा फूफा का दिमाग पहले से ही ठीक नहीं था जब वह चाय बना कर लाई तब शायद उनको चाय अच्छी नहीं लगीऔर वह उनके ऊपर चिल्लाने लगे और बुआ को मारने के लिए हाथ उठाया बुआ ने पलट कर जवाब मैं कहा कि इतनी सी बात के लिए इस तरह से गाली-गलौच ठीक नहीं ।

फूफा ने उन्हें घर से निकालने की धमकी देकर कहा कि तुम्हारे सामने मेरी औकात ही क्या है घर में पैसा तो मैं कमाता हूं और बुआ के साथ मारपीट करने लगे। बुआ मेरे पास आई और बोली घर में औरतों की इज्जत नहीं काश मैंने भी समय रहते शिक्षा ग्रहण कर ली होती तो आज मैं कमा सकती और इस हिंसा के खिलाफ आवाज उठा सकती है बुआ ने कहा मेरी तरफ देखते हुए बेटा तुम अपने जीवन में शिक्षा ग्रहण करना और कभी भी इस घरेलू हिंसा को मत सहना बुआ परिवार के कारण वह आज तक आवाज न उठा सकी इतना सुनने के बाद मेरे मन में यह ख्याल आया कि एक लड़की के जीवन में शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है बिना शिक्षा के उसका जीवन दूसरों की गुलामी करने के लिए मजबूर हो जाता है।

शिक्षा के अभाव में ही पुरुष स्त्रियों पर राज करते हैं क्योंकि वह शिक्षित नहीं होती और वह कमाकर घर में पैसे नहीं ला रही होती। जब तक समाज में पुरुष स्त्रियों की इज्जत नहीं करेंगे करना अपनी मानसिकता को स्त्रियों के प्रति नहीं बदलेंगे उन्हें सम्मान नहीं देंगे तब तक हमारा समाज नहीं विकसित हो पाएगा ।

-नन्दिनी

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