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लखनऊ : राजधानी में फर्जी अस्पतालों का बोलबाला ।

राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या मिलीभगत कहें बिना रजिस्ट्रेशन और बिना मानकों के ही लगभग 80% अस्पताल चल रहे हैं। आम जनता इस बात से बेखबर है की अस्पताल फर्जी है या रजिस्टर्ड है। यहां तक की कुछ दिन किसी चिकित्सक के साथ कम्पाउन्डरी करने के बाद उक्त लोग अपना अस्पताल खोल कर बैठ जाते है। और मरीजों को ठगने का खेल खेलने लग जाते है। स्वास्थ्य विभाग की ओर देखें तो उसकी मानो आंखों पर धृतराष्ट्र की तरह पट्टी बंधी है।
राजधानी लखनऊ के कानपुर रोड, मोहान रोड, आलम बाग से दुबग्गा रोड व हरदोई रोड, व मोहन लाल गंज में सैकङो की संख्या में बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल चल रहे है। इन अस्पतालों को झोलाछाप चिकित्सक चला रहे है। अस्पताल के बोर्ड पर बङे बङे चिकित्सकों के नाम लिखकर मरीजों को ठगने वाले ये फर्जी चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई डर नहीं है । हालात यह है कि चारों तरफ फर्जी अस्पतालों का बोलबाला है ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सत्ता सम्हालते ही फर्जी चिकित्सकों व फर्जी अस्पतालों पर कार्रवाई करने के आदेश दिये थे। मगर रिश्वतखोर अधिकारियो ने मुख्यमंत्री की एक न सुनी और मनमर्जी रिश्वत लेकर तमाम फर्जी अस्पतालों को आश्रय दिये हुये है। बुध्देश्वर से लेकर काकोरी मोङ तक तमाम फर्जी अस्पतालों को संचालित किया जाता है। कार्रवाई की बात कहकर मोटी रकम की भी वसूली की जाती है। यही वजह है की स्वास्थ्य विभाग फर्जी अस्पतालों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहा है।
वही मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की हर योजना पर अधिकारी ही पलीता लगा रहे है।
सीतापुर रोड,आईआईऐम रोड,दुबग्गा, अन्धे की चौकी, ठाकुरगंज, व स्कूटर इन्डिया जैसी जगहों पर तमाम फर्जी अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है।
राजधानी में इतने बङे पैमाने पर फर्जी अस्पतालों का संचालन इस बात को बताने के लिये काफी है की स्वास्थ्य विभाग किस तरह काम कर रहा है।
फर्जी अस्पतालों का ये संचालन यूं ही नहीं हो रहा इसके पीछे स्वास्थ्य माफिया काम कर रहा है जो राजधानी के स्वास्थ्य विभाग पर हावी है और सीएमओ को वश में किये हुये है।
दुबग्गा के पास बने लखनऊ तुलसी अस्पताल एंव ट्रामा सेन्टर नामक अस्पताल में तो पिछले दिनों एक युवती के साथ बदसलूकी की घटना सामने आई थी। बावजूद इसके ये अस्पताल आज भी बदस्तूर चल रहा है।
यहाँ ये बताना जरूरी है की इन अस्पतालों को खोलने वाले ज्यादातर लोग या तो अनपढ़ हैं या फिर चिकित्सक लाइन से कभी कोई वास्ता ही नहीं रहा।
काकोरी मोङ पर बना वर्मा अस्पताल भी मानकों पर कहीं खरा नही उतरता। भेङ बकरियों की तरह यहां मरीजों को देखा जाता है। यही हाल बुध्देश्वर रिंग रोड पर बने डिवी हास्पीटल व मां वैष्णो हास्पीटल का है। छोटे छोटे कमरों में 20-20 बैड के ये अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के मुंह पर तमाचा मार रहे है।
बुध्देश्वर में ही बने श्री सेवा हास्पीटल, पर तो फिलहाल ताला पङ गया है लेकिन रिंग रोड पर स्थित लखनऊ मार्डन हास्पीटल के मालिक अमित शुक्ला ने अन्धे की चौकी पर न्यू हिन्दुस्तान हास्पीटल के नाम से एक और अस्पताल खोलकर ये जता दिया है की फर्जी अस्पतालों में बिना रजिस्ट्रेशन के मोटी कमाई का जरिया है । यही कारण है की घर घर में अस्पताल खुल गये है और मुख्य चिकित्सा अधिकारी एंव स्वास्थ्य विभाग कुम्भकर्णीय नींद सो रहा है।
जब स्वास्थ्य विभाग में बङे पैमाने पर फर्जीवाङा चल रहा है तो उत्तर प्रदेश का विकास कैसे होगा। जिस प्रदेश की जनता का ज्यादातर ईलाज फर्जी अस्पतालों में फर्जी चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा हो उस प्रदेश का भला क्या विकास होगा।

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