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पाकिस्तान का पानी बंद करेगा भारत, 3 नदियों का पानी रोकने पर फैसला

पुलवामा हमले के बाद देश में बहुत गुस्सा है और यही कारण है कि केंद्र की मोदी सरकार लगातार ऐसे प्रयास में लगी हुई है जिससे पाकिस्तान को घेरा जा सके। जी हां, अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नकेल कसने के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तान जाने वाले पानी को बंद करने की तैयारी कर ली है।

सरकार ने पाकिस्तान की ओर जाने वाले ‘हमारे हिस्से के पानी को रोकने और पूर्वी नदियों की धारा जम्मू कश्मीर और पंजाब की ओर मोड़ने का फैसला किया। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले पुलवामा में आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

आपको बता दें कि पाकिस्तान के आतंकियों द्वारा बार-बार किए जा रहे हमलों के बाद कई बार पाकिस्तान की ओर जाने वाली नदियों का पानी रोकने की मांग उठ चुकी है। पुलवामा हमले के बाद भी कई संगठन पाकिस्तान के साथ हुए सिंधु जल समझौता रद्द करने की मांग कर रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत पाकिस्तान जाने वाली नदियों के पानी को दूसरी नदियों में समायोजित कर रोक सकता है तो यह भारत का पाकिस्तान ने खिलाफ एक बहुत बड़ा कदम होगा।

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सबसे पहले पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को कमजोर करने के लिए उसका मोस्ट फेवर्ड नेशन यानि कि MFN का दर्जा समाप्त कर दिया है।

आपको बता दें कि भारत ने पाकिस्तान का MFN का दर्जा समाप्त करने का फैसला 23 साल बाद लिया है। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान से आने वाले सामान पर 200 % का आयात शुल्क लगा दिया है।

एक अन्य ट्वीट में गडकरी ने कहा, “गडकरी ने कहा कि रावी नदी पर शाहपुर..कांडी बांध का निर्माण शुरू हो गया है। इसके अलावा यूजेएच परियोजना के जरिये जम्मू कश्मीर में उपयोग के लिये हमारे हिस्से के पानी का भंडारण होगा और शेष पानी दूसरी रावी व्यास लिंक के जरिये अन्य राज्यों के बेसिन में प्रवाहित होगा।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन सभी परियोजनाओं को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जा चुका है।

सिंधु जल संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच जल बटवारे का समझौता हुआ है। समझौते के तहत भारत तीन ‘पूवीर् नदियों’ व्यास, रावी और सतलुज के प्रवाह का 33 मिलियन (3.3 करोड़) एकड़ फीट पानी (एमएएफ) पर नियंत्रण भारत को प्रदान किया गया। वहीं, भारत की ‘पश्चिमी नदियों’ सिंधु, चेनाब और झेलम के प्रवाह का 8० एमएएफ पानी पर नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया।

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