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लोकसभा में हुआ तीन तलाक़ बिल पास, कांग्रेस ने किया वाकआउट


तीन तलाक बिल पास

मुस्लिम समाज के कुछ वर्गों से जुड़ी इंस्टेंट ट्रिपल तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की प्रथा पर रोक लगाने के मकसद से लाए गया बिल पर गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया. इस बिल को लेकर सदन में लंबी बहस हुई.सदन में विपक्षी पार्टियां जहां इस बिल का विरोध कर रही हैं, वहीं सरकार का कहना है कि नारी गरिमा के हक में सभी पार्टियां साथ आएं. इस बिल के पक्ष में 245 और विपक्ष में 11 वोट पड़े.

तीन तलाक बिल पर लोकसभा में दो महिला सांसदों में वार पलटवार हुआ। कांग्रेस की सुष्मिता देव ने कहा कि मुंह में राम बगल में छुरी की राह पर है मोदी सरकार। उन्होंने पूछा कि गुजरात की ऐसी हिंदू महिला जिसे पति ने छोड़ दिया हो, उसके लिए क्या करेंगे कानून मंत्री, दीवानी मामले को आपराधिक बना कर सरकार ने पीड़ित महिलाओं से की अनदेखी की है। इसपर मीनाक्षी लेखी ने कहा कि तो समान नागरिक संहिता क्यों स्वीकार करती कांग्रेस। शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा कि तब इस पार्टी ने इतिहास बनाने का मौका गंवा दिया था।

बिल में जरूरी संशोधन को लेकर कांग्रेस और एआईएडीएमके ने सदन से वॉक आउट कर दिया. जिसके बाद वोटिंग हुई और बिल पास हो गया.कांग्रेस की मांग थी कि इस बिल को लेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुझाव दिया कि इस पर अगले हफ्ते चर्चा कराई जाए. इस पर संसदीय कार्य मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष से आश्वासन मांगा कि उस दिन बिना किसी बाधा के चर्चा होने दी जाएगी. इस पर खड़गे ने कहा, ‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस विधेयक पर 27 दिसंबर को चर्चा कराइए. हम सभी इसमें हिस्सा लेंगे. हमारी पार्टी और अन्य पार्टियां भी चर्चा के लिए तैयार हैं.’

तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला यह विधेयक बीते 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था. इस प्रस्तावित कानून के तहत एक बार में तीन तलाक देना गैरकानूनी और अमान्य होगा और ऐसा करने वाले को तीन साल तक की सजा हो सकती है.

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा- कांग्रेस अगर चाहती तो यह बिल 30 साल पहले पास करा सकती थी। लेकिन, उसने बंटवारे की राजनीति को प्राथमिकता दी।

इंस्टेट ट्रिपल तलाक़ क्या है?

तलाक़-ए-बिद्दत या इंस्टेंट तलाक़ दुनिया के बहुत कम देशों में चलन में है, भारत उन्हीं देशों में से एक है.

एक झटके में तीन बार तलाक़ कहकर शादी तोड़ने को तलाक़-ए-बिद्दत कहते हैं.

ट्रिपल तलाक़ लोग बोलकर, टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए या व्हॉट्सऐप से भी देने लगे हैं.

एक झटके में तीन बार तलाक़ बोलकर शादी तोड़ने का चलन देश भर में सुन्नी मुसलमानों में है लेकिन सुन्नी मुसलमानों के तीन समुदायों ने तीन तलाक़ की मान्यता ख़त्म कर दी है.

हालांकि देवबंद के दारूल उलूम को मानने वाले मुसलमानों में तलाक़-ए-बिद्दत अब भी चलन में है और वे इसे सही मानते हैं.

इस तरीक़े से कितनी मुसलमान महिलाओं को तलाक़ दिया गया इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है.

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