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लखन‌‌ऊ : सुबह से ही खुल जाते हैं राजधानी में मयखाने ।।

लखनऊ- सरकार के तमाम फैसलों को अब तक धता बताते हुये कारोबारियों ने सरकार की एक न मानी है। और सरकार के फैसलों के खिलाफ जाते हुये उसकी एक न मानी । फैसलों को चूना लगाने में सरकार के मुलाजिम भी पीछे नही है। लखनऊ के मयखाने पुलिस और आबकारी विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत का ही नतीजा है जो नियमों को ताक पर रखकर सुबह से देर रात तक मयखाने खुलते है। जबकी सरकार का जो आदेश है उसी आदेश को चूना लगाने वाले उसी सरकार के मुलाजिम है।

योगी आदित्य नाथ ने सत्ता सम्हालते ही ताबङतोङ तमाम फैसलों पर मुहर लगाई थी ।जिसमें फर्जी स्कूलों पर लगाम । खुलेआम मांस बेचना, आपरेशन मजनूँ, फर्जी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई, तथा शराब की दुकानें दिन में 12 बजे से रात दस बजे तक ही दुकानों का खुलना था।

अब बात शराब की करें तो राजधानी में अधिकांश मयखाने सुबह से ही खुल जाते है और आधी रात तक चलते है।कभी-कभी तो पूरी रात भी शराब बिकती देखी जा सकती है।

देसी शराब की दुकान में अवैध कैन्टीन भी खुली होती है। इसी कैन्टीन में एक खिङकी शराब की दुकान की भी होती है। इसी खिङकी से शराब की सप्लाई दिन रात होती है।
कहीं कहीं पर कैन्टीन वाले ठेकेदार ही शराब को बेचते पाये जाते हैं । यह हाल तब और हास्यास्पद हो जाता है जब पुलिस चौकी या थाने से मात्र पचास कदम पर शराब की दुकान खुली हो और वो सुबह से ही दुकान पर शराब बेच रहा हो। तेलीबाग चौराहे पर पुलिस चौकी बनी है। इस चौकी से पचास कदम पर ही देसी शराब का ठेका है। ये ठेका पुलिस की मौजूदगी में ही सुबह 6 बजे खुल जाता है और आधी रात तक चलता है। अब सवाल ये उठता है की मात्र पचास कदम पर हो रहा अपराध पुलिस को नहीं दिखाई पङ रहा तो बाकी अपराध पुलिस को कैसे दिखेंगे।
यही हाल राजधानी के प्रत्येक हिस्सों में है। जहाँ सुबह सवेरे ही मयखाने खुल जाते हें और आधी रात तक चलते है। अब सवाल उठता है कि क्या आबकारी विभाग को राजधानी के मयखानों की जानकारी नहीं है । अगर ऐसा है तो आबकारी विभाग अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह है।और अगर जानकारी है तो मोटी रकम हर माह लेकर कानून तोङकर सरकार को खुली चुनौती दे रहे है।
यही हाल पुलिस का है । पुलिस भी ले देकर काम चलाने में भरोसा करती है ना की अपराधों पर लगाम कसने में ।
यही कारण है राजधानी में अपराधियों का बोलबाला है ।।

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