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मथुरा /भाजपा की जिला व महानगर की घोषित कार्यकारिणी पर उठे सवाल


ओबीसीए एससी को नहीं दिया गया महत्व, संविधान की उडी धज्जियां
भारतीय जनता पार्टी जिला व महानगर की शनिवार को घोषित हुई कार्यकारिणी पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ पुराने भाजपाईयों ने जिला व महानगर अध्यक्षों पर पार्टी के संविधान की धज्जियां उड़ाने वाला बताया है। कार्यकारिणी विस्तार में एससी/एसटी, महिलाओं व ओबीसी को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है जबकि ब्राह्मणों की पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने से उनकी बल्ले-बल्ले हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी के संविधान के मुताबिक आठ उपाध्यक्ष, चार महामंत्री, आठ मंत्री, एक कोषाध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। जिसमें से सात महिला पदाधिकारी और दो अनुसूचित जाति, जनजाति के अनिवार्य रूप से पदाधिकारी रखे जाने आवश्यक हैं। परंतु भाजपा जिलाध्यक्ष नगेन्द्र सिकरवार द्वारा सात महिला पदाधिकारियों के स्थान पर सिर्फ  एक पदाधिकारी को कार्यकारिणी में स्थान दिया गया है जबकि अनुसूचित जाति जनजाति का एक भी पदाधिकारी नहीं रखा गया है। पार्टी की जिला कार्यकारिणी में सर्वाधिक 11 ब्राह्मण, दो ठाकुर, छह जाट, तीन वैश्य, 3 बीसी के पदाधिकारी रखे गए हैं। जिस कारण एससी और ओबीसी  के भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
इसी प्रकार भाजपा महानगर अध्यक्ष चेतन स्वरूप पाराशर द्वारा भी जिलाध्यक्ष की गलतियों को दोहराया गया है। महानगर कार्यकारिणी में सात महिला पदाधिकारियों के स्थान पर मात्र तीन, एक अनुसूचित जाति के पदाधिकारी को स्थान मिला है। गौर करने की बात यह है कि महानगर में भी 11 ब्राह्मण, सात वैश्य, एक जाट, दो ठाकुर, तीन बीसी और एससी के पदाधिकारी को स्थान मिला है। महानगर की कार्यकारिणी में एससी और ओबीसी को कम प्रतिनिधित्व मिला है। जहां भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ओबीसी और एससी को पार्टी से अधिक से अधिक संख्या में जोडऩे को जोर दे रहा है वहीं पार्टी के जिला एवं महानगर अध्यक्ष पार्टी संविधान का उल्लंघन करते हुए ओबीसी और अनुसूति जाति को पर्याप्त स्थान न देकर कार्यकारिणी के विस्तार कर रहे हैं। पार्टी संविधान के जानकारों का कहना है कि पार्टी संविधान के पृष्ठ संख्या 8 के ग श्रेणी के जिला कार्यकारिणी में सात महिला और दो अनुसूचित जाति के पदाधिकारी होना आवश्यक है, नहीं तो कार्यकारिणी असंवैधानिक मानी जाएगी। इसलिए इस कार्यकारिणी को तत्काल भंग कर नयी कार्यकारिणी जिला व महानगर अध्यक्ष को घोषित करनी चाहिए। अन्यथा पार्टी के  महिला और अनुसूचित जाति के कार्यकर्ताओं का असंतोष आगामी लोकसभा चुनाव के दौरान देखने को मिल सकता है। सबसे खास बात ये रही कि घोषित जिला कमेटी में अन्य पार्टी से आये दो लोगों को विशेष स्थान दिया गया है जिसको लेकर पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी सुगबुगाहट है।

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