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फूट गया पाप का घड़ा, राजवल्लभ ने शराब पिलाकर नाबालिग से किया था गंदा काम, उम्रकैद की सजा

नाबालिग से रे’प मामले में आरोपी राजद से निलंबित विधायक राजवल्लभ यादव को पटना के एमएलए-एमपी कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पचास हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले में आरोपी रही सुलेखा देवी को भी उम्रकैद की सजा और 20 हजार का अर्थदंड लगाया गया है। इसके साथ ही अन्य चार दोषियों को 10-10 साल जेल की सजा सुनाई गई है।बता दें कि15 दिसंबर को इस मामले की कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जिसमें राजवल्लभ यादव और अन्य पांचों आरोपी कोर्ट पहुंचे थे। इस मामले की सुनवाई पटना के एमएलए-एमपी कोर्ट में हुई थी। छह फरवरी 2016 को राजवल्लभ यादव ने शराब पिलाकर एक नाबालिग से दुष्कर्म किया था।

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपियों में शामिल सुलेखा देवी ने बर्थ डे पार्टी के बहाने अनजान जगह पर ले जाकर उसे जबरन शराब पिलाई और फिर उसे राजवल्लभ के हवाले कर दिया। राजवल्लभ ने नाबालिग से दुष्कर्म किया था।राजबल्लभ प्रसाद को आईपीसी की धारा 376 एवं पॉक्सो की धारा 4 व 8 के तहत दोषी करार दिया गया है। वहीं अभियुक्त सुलेखा देवी एवं राधा देवी को आपराधिक षड्यंत्र रचने के लिए व आईपीसी की धारा 109, 120बी एवं 376 के तहत तथा इम्मोरल ट्रेफिक एक्ट के तहत धारा 4 एवं 5 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4 एवं 8 के तहत दोषी करार दिया गया था।  मामले में अन्य अभियुक्त संदीप सुमन उर्फ पुष्पांजय, छोटी देवी व  टूसी देवी को आपराधिक षड्यंत्र रचने एवं आईपीसी की  धारा 366 ए के तहत तथा अनैतिक देह व्यापार अधिनियम की धारा 4 एवं 5  के तहत दोषी करार दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए राज्य में मार्च 2018 में विशेष कोर्ट बनाया गया। इसी आदेश के आलोक में पटना सिविल कोर्ट के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश परशुराम सिंह यादव को एमपी-एमएलए कोर्ट का विशेष न्यायाधीश बनाया गया। बिहार के सभी जिलों की अदालतों में चल रहे जनप्रतिनिधियों के खिलाफ करीब तीन सौ आपराधिक कांडों को इस कोर्ट में ट्रांसफर किया गया।  मार्च से अबतक विशेष कोर्ट ने 20 से अधिक आपराधिक मामलों का निपटारा किया। साक्ष्य के अभाव में कई आरोपी बरी हो गए। यह पहला आपराधिक कांड है, जिसमें विशेष कोर्ट ने दोषी ठहराया है।इस घटना के संबंध में बिहारशरीफ महिला थाने में 9 फरवरी 2016 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने राजवल्लभ यादव समेत छह आरोपियों पर आरोप पत्र दाखिल किया था। बिहारशरीफ सिविल कोर्ट के पॉस्को कोर्ट ने 6 सितबंर 2016 को आरोप का गठन किया था। इसके बाद सरकार द्वारा नियुक्त विशेष लोक अभियोजक ने अभियोजन की ओर से गवाही कराई। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर इस कांड को पटना के एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित किया गया। फिर सभी आरोपितों को बिहारशरीफ जेल से पटना के बेउर जेल भेज दिया गया। इसके बाद एमपी-एमलए कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। पटना हाईकोर्ट के एक आदेश पर प्रतिदिन सुनवाई चल रही थी

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