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मुर्दों का शहर : जो भी गया, वो लौट कर नहीं आया!

वो कहते है ना की खूबसूरत दिखने वाली चीज खतरनाक भी हो सकती है, ऐसा ही कुछ इस जगह के साथ भी है। देखने पर मन को मोह लेने वाली ये जगह वैसे तो बहुत खूबसूरत है, लेकिन फिर भी कोई जल्दी से यहां जाने की हिम्मत नहीं करता..और जाएं भी तो कैसे इस ‘मुर्दों के शहर’ में जहां रहती है तो सिर्फ लाशें।हम बात कर रहें हैं रूस के उत्तरी ओसेटिया के सुदूर वीरान इलाके में दर्गाव्स गांव की।

बाहर से खूबसूरत दिखने वाली इस जगह को ‘सिटी ऑफ द डेड’ यानी ‘मुर्दों का शहर’ के नाम से भी जाना जाता है। यह जगह पांच ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच छिपी हुई है। यहां पर सफेद पत्थरों से बनी अनगिनत तहखाना नुमा इमारतें है। इनमें से कुछ तो 4 मंजिला ऊंची भी है।

 

क्या कहते हैं स्थानीय लोग

इस जगह को लेकर स्थानीय लोगों की तरह-तरह की मान्यताएं भी हैं। लोगों का मानना है कि पहाड़ियों पर मौजूद इन इमारतों में जाने वाला लौटकर नहीं आता। शायद इसी सोच के चलते, यहां मुश्किल से ही कभी कोई ट्युरिस्ट पहुंचता है। हालांकि, यहां तक पहुंचने का रास्ता भी आसान नहीं है। पहाड़ियों के बीच सकरे रास्तों से होकर यहां तक पहुंचने में तीन घंटे का वक्त लगता है। यहां का मौसम भी सफर में एक बहुत बड़ी रुकावट है।

लोगों का मानना है की 18वीं सदी में यहां रहने वाले लोग अपने परिवार के बीमार सदस्यों को इन घरों में रखते थे, उन्हें यहीं पर खाना तथा और जरूरत की चीजें देते थे लेकिन उनको बाहर जाने की इजाजत नहीं दी जाती थी….उनकी मृत्यु होने तक।

यह जगह रहस्यमयी तो है ही साथ ही रोमांचक भी इसलिए ट्युरिस्ट के अलावा पुरात्तवविदों और वैज्ञानिकों की भी इसमें खास रूची बनी रहती है, ये जानने की यहां पर रहने वाले लोगों का जीवन कैसा था।

कुएं का रहस्य

यहां पुरातत्वविदों को हर तहखाने के सामने कुआं भी मिला। इन कुओं को लेकर ये कहा जाता है कि अपने परिजनों के शवों को दफनाने के बाद लोग कुएं में सिक्का फेंकते थे। अगर सिक्का तल में मौजूद पत्थरों से टकराता, तो इसका मतलब ये होता था कि आत्मा स्वर्ग तक पहुंच गई।

विशाल कब्रिस्तान

हर इमारत की प्रत्येक मंजिल में लोगो के शव दफनाए हुए है। जो इमारत जितनी ऊंची है उसमे उतने ही ज्यादा शव है। इस तरह से हर मकान एक कब्र है और हर कब्र में अनेक लोगो के शव दफनाएं हुए है। ये सभी कब्र तकरीबन 16वीं शताब्दी से संबंधित हैं। यहां तकरीबन 99 इमारतें है। इस तरह से हम कह सकते है की यह जगह 16 वी शताब्दी का एक विशाल कब्रिस्तान है। जहां पर आज भी उस समय से सम्बंधित लोगों के शव दफन है। हर इमारत एक परिवार विशेष से सम्बंधित है जिसमे केवल उसी परिवार के सदस्यों को दफनाया गया है।

 

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