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लखनऊ : फर्जी अस्पतालों पर कब लगेगी लगाम ?

भगवान के बाद दूसरे नम्बर पर जिसको भगवान का दर्जा दिया जाता हैं वो है चिकित्सक,, चिकित्सक को ही भगवान के बाद दूसरे नम्बर पर भगवान कहा जाता है ।।
मगर इस पेशे को अब नजर लग गई है । आज हर तीसरा व्यक्ति या तो झोलाछाप चिकित्सक बनकर अपनी दुकान चला रहा है या फिर चमक दमक के साथ बङे बङे अस्पताल खोलकर मरीजों की जिन्दगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
राजधानी लखनऊ के बुध्देश्वर हो या दुबग्गा रिंग रोड, हरदोई रोड,सीतापुर रोड, अन्धे की चौकी , स्कूटर इन्डिया, कटी बगिया, बनी, लतीफ़ नगर,हरौनी, मोहान रोड, घुरघुरी तालाब,मोहन लालगंज,रायबरेली रोड ,कुर्सी रोड, तथा लखनऊ के तमाम हिस्सों में इस समय फर्जी अस्पतालों का बोलबाला है ।गंदे वातावरण में संकरे दरवाजे के साथ-साथ गंदे कमरों में जबरन ठूंसे गये मरीजों की जिन्दगी के साथ दसवीं बारहवीं पास व्यक्ति अपने आपको डाक्टर बताकर फर्जी इलाज कर रहे है।अपने अस्पतालों के सामने बङे बङे बोर्ड पर मशहूर चिकित्सकों के नाम लिखकर झोलाछाप चिकित्सक चांदी काट रहे है। जब इन मशहूर चिकित्सकों से पूछा गया की क्या ये छोटे छोटे अस्पताल आपके खुले हुये है तो तमाम चिकित्सकों ने तो अनभिज्ञता जताई । अस्पताल में मानक के नाम पर कुछ नही है। यहां तक की फायर यन्त्र तक नहीं है । अगर किसी तरह से इन अस्पतालों में आग लग जाती है तो मरीजों को भगवान ही बचा सकता है।

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स्कूटर इन्डिया स्थित श्याम हास्पीटल को विगत समय छापा मारकर सीज किया गया था। आरोप था की अस्पताल का मालिक आठवीं पास था और वही डाक्टर बनकर ईलाज कर रहा था। साथ साथ बङे बङे आपरेशन भी कर रहा था। ये अस्पताल लगभग पांच माह तक बन्द रहा और उसके बाद फिर खुल गया। आज भी वही चिकित्सक इलाज कर रहा है और आपरेशन भी कर रहा है।तो क्या पांच माह में फर्जी चिकित्सक ने कौन सी डिग्री ले ली जिससे उसका अस्पताल भी खुल गया और बदस्तूर आज भी वही चिकित्सक आपरेशन समेत सभी मरीजों का इलाज भी कर रहा है।
मोहान लाल गंज में भी दर्जनों छोटे बङे फर्जी अस्पताल बेखौफ़ होकर अपना धन्धा चला रहे हैं।
दुबग्गा हरदोई रोड पर भी दर्जनों की तादाद में फर्जी अस्पताल खुले हुये है। यहां भी मरीजों को चूना लगाकर अपना गोरखधन्धा चलाया जा रहा है।
इन फर्जी अस्पतालों में अनपढ से लेकर दसवीं पास नान मेडिकल लोग इलाज करते है। तमाम अस्पतालों में एक्सपायरी दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। लखनऊ के ठाकुरगंज में पकङे गये सेंट मैरी हास्पीटल में एक्सपायरी दवाइयों का इस्तेमाल किया जा रहा था। ये अस्पताल सीज भी हुआ मगर कुछ समय बाद ये फिर खुल गया ।।
जब इन फर्जी अस्पतालों के चिकित्सकों से पूछा जाता है की आप इतने बङे पैमाने पर फर्जी तौर से अस्पताल कैसे चला रहे है तो बताया जाता है की उनकी बहुत ऊपर तक पहुंच है। कुछ अस्पताल तो विधायकों और सांसदों के नाम पर चलाये जा रहे है तो कुछ सीएमओ के नाम से फर्जी अस्पतालों का संचालन कर रहे है।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की हीला हवाली जग जाहिर है । साथ में ये भी जाहिर है की सरकारी अमराइयों भ्रष्टाचार में इतना बुरी तरह से लिप्त है की उसे आम आदमी की जिन्दगी से कोई मतलब नहीं है । उसको मतलब है तो बस अपनी जेबों को भरने से है।सीएमओ और उसकी टीम की लापरवाही एक दिन तमाम जिन्दगियों को मौत के आगोश में सुला देगी।

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